Wednesday, March 14, 2012

अपने अंजाने !!!!!


जाते जाते वह कह गया " अरे मेरा fb account तो पीछे हि रह गया !"
यमराज चकराए से देखे उसकी ओर कुछ नज़रें घुमाये से 
पूछे
"रे मानव अपनों का कोई ज़िक्र नहीं 
क्या तुझे उनकी कोई फ़िक्र नहीं"
वह रुका, सोचा, मुस्कुराया बिन कुछ बोले मन में फुसफुसाया 
यमराज का सर और चकराया 
"बताना ज़रा तू क्यों मुस्कुराया"

"अपनों को याद किया तभी fb कि बात किया " 
उसी वक़्त यमराज ने सर अपना खुजलाया !
तभी उस मानव ने इस लोक के fb के बारे में विस्तार से समझाया 
"मिलने का समय नहीं 
ना ही बोलने का वक़्त 
घर बैठे दुनिया से मिलते 
हम अंजानो से भी बढ़ाते हैं रिश्ते 
जब जब कोई भाता है वह हमेशा के लिए हमारी friend list में रह जाता है
रोने धोने का झंझट नहीं 
जो ना भाए
उसे हम कभी भी अपनी friend list से हटायें!
fb में हम काम भी करते 
ऐसे ना सही वहा farmVille में खेती जरुर करते!
सुनता है fb जब भी होते दुखी 
ना महसूस करते अकेला कभी 
खुश रहते fb से  हम सभी !

यमराज समझे उस नादान की नासमझी को मुस्कुरा कर बस कही एक बात 
"अंजाने अपनों का नहीं तेरे अपने अपनों का ज़िक्र किया था मैंने!
जो रो-रो कर आज बुरा हाल किये रे 
और सोचते हैं अब तेरे बिन वे कैसे जिए रे!